जहाँ नेमी के चरण पड़े, गिरनार वो धरती है
वो प्रेम मूर्ती राजूल, उस पथ पर चलती है
भगवान मेरी नईया, उस पार लगा देना,
अब तक तो निभाया है,आगे भी निभा देना ॥
नाम तुम्हारा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा।
तेरी प्रतिमा इतनी सुन्दर, तू कितना सुन्दर होगा ॥